की शुरुआत विशाल कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं, युवाओं एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था का परिच
य दिया।
सुबह से ही काली माता स्थान पर श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयघोष के बीच कलश पूजन के बाद यात्रा का शुभारंभ हुआ। सिर पर पवित्र कलश धारण किए महिलाओं की लंबी कतारें आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण, राधारानी और माता काली के जयकारे लगाते आगे बढ़ रहे थे। धार्मिक गीतों और मंत्रों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
कलश यात्रा काली माता स्थान से प्रारंभ होकर उत्तर पारा, होला पांडेय का पुरवा, मोतीगंज बाजार स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर और मनोकामना सिद्ध आश्रम सहित विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर पुनः कथा स्थल पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। कई स्थानों पर जलपान और प्रसाद की भी व्यवस्था की गई थी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला।
आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का उद्देश्य समाज में धार्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, धर्म, भक्ति और मानव जीवन के आदर्शों का वर्णन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का एक सशक्त माध्यम भी है।
कथा का वाचन अयोध्या के सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित हरि प्रसाद दुबे द्वारा किया जाएगा। अपने मधुर और प्रभावशाली प्रवचनों के लिए विख्यात पंडित दुबे कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के गूढ़ रहस्यों एवं जीवनोपयोगी संदेशों से अवगत कराएंगे। कथा प्रतिदिन सायं 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्रीमती रेनू उपाध्याय एवं पंकज उपाध्याय हैं, जिन्होंने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर कथा यज्ञ का शुभारंभ कराया। यजमान परिवार ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की अपील की।
आयोजन समिति के संयोजक एवं जिला पंचायत सदस्य रामसागर दुबे ‘बब्लू’ ने बताया कि कथा के अंतिम चरण में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 16 जून को पूर्णाहुति हवन संपन्न होगा, जिसमें श्रद्धालु आहुति देकर परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। इसके पश्चात 17 जून को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और युवाओं को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को भी बल मिलता है।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के ब्राह्मण अध्यक्ष उत्तर प्रदेश रविनंदन त्रिपाठी, गोपाल यादव, सुरेंद्र दुबे, संजय दुबे, शंकर यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए कथा के सफल संचालन हेतु सहयोग की अपील की।
मोतीगंज में शुरू हुई यह सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश दे रही है। कलश यात्रा के साथ हुए इस भव्य शुभारंभ ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग दिया है।