
अयोध्या। धार्मिक आस्था और परंपरा के संगम का अद्भुत दृश्य बुधवार को उस समय देखने को मिला, जब सरायरासी गांव में नौ दिवसीय रामकथा से पूर्व भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर पूरे गांव में श्रद्धा और उत्साह के साथ यात्रा निकाली, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। ढोल-नगाड़ों, जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह यात्रा विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए कथा स्थल तक पहुंची, जहां विधिवत पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
गांव की गलियों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल नजर आया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर कलश यात्रा में शामिल हुईं, वहीं पुरुषों और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। श्रद्धालुओं के ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। आयोजन स्थल पर पहुंचने के बाद आचार्यों द्वारा वैदिक रीति-रिवाज से पूजा संपन्न कराई गई, जिससे नौ दिवसीय रामकथा के लिए शुभ संकेत माने जा रहे हैं।
यह धार्मिक आयोजन 19 मार्च से जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह के निवास स्थान पर शुरू होगा, जो 27 मार्च तक चलेगा। इस दौरान प्रसिद्ध संत और श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज द्वारा रामकथा का वाचन किया जाएगा। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।
आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पार्किंग व्यवस्था, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो लगातार व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह ने इस अवसर पर कहा कि रामकथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह समाज को नैतिक मूल्यों, एकता और आध्यात्मिकता का संदेश देती है। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का श्रवण करें और पुण्य लाभ अर्जित करें।
वहीं आयोजन से जुड़े प्रतिनिधि आलोक सिंह रोहित ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी टीम समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हर छोटी-बड़ी व्यवस्था का ध्यान रखा जा रहा है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो। स्वयंसेवकों की टीम लगातार समन्वय बनाकर कार्य कर रही है, जिससे आयोजन व्यवस्थित और सुचारु रूप से सम्पन्न हो सके।
इस मौके पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला बताया। ग्रामीणों में इस धार्मिक आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और सभी लोग इसे सफल बनाने में जुटे हैं।
सरायरासी में आयोजित होने जा रही यह रामकथा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी संदेश दे रही है। कलश यात्रा के साथ ही जिस भव्यता और श्रद्धा के साथ इसकी शुरुआत हुई है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह आयोजन क्षेत्र के लिए एक यादगार धार्मिक उत्सव साबित होगा।