बाद रामलला के दर्शन करेंगे। यह परंपरा में एक अद्वितीय अध्याय है, क्योंकि 300 वर्षों में पहली बार गद्दीनशीन किसी अन्य मंदिर में दर्शन हेतु निकले हैं।
मुख्य बिंदु:
अक्षय नवमी के पावन अवसर पर यह आयोजन हो रहा है।
शाही जुलूस में हाथी, घोड़े, बैंड-बाजा और 1000 नागा साधु शामिल हैं।
51 स्थानों पर स्वागत और पुष्प वर्षा की जाएगी।
सरयू नदी में हनुमान जी के निशान का पूजन और शाही स्नान के बाद रामलला के दरबार में दर्शन।
रामलला को राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा सुनाई जाएगी।
हनुमानगढ़ी के भोजनालय से निर्मित 56 भोग रामलला को समर्पित किए जाएंगे।
यह आयोजन धार्मिक परंपराओं और भक्ति का अद्भुत संगम है।