केसरिया रंग का ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है, जिसे विशेष पैराशूट फैब्रिक और रेशमी धागों से बनाया गया है ताकि यह तेज हवाओं और तीनों मौसमों को सह सके। ध्वज पर भगवान राम के सूर्यवंश का प्रतीक सूर्य, सृष्टि का मूल ‘ॐ’ और इक्ष्वाकु वंश का राज चिन्ह कोविदार वृक्ष अंकित हैं। यह ध्वज 161 फीट ऊंचे मंदिर के शिखर पर 42 फीट ऊंचे ध्वजदंड पर फहराया गया है, जो 360 डिग्री घूमने वाले चैम्बर में स्थित है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ध्वजारोहण समारोह का नेतृत्व किया और इसे भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि यह धर्मध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है, और यह राम के आदर्शों का उद्घोष करता है।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे 140 करोड़ भारतीयों की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह भगवा ध्वज धर्म, निष्ठा, सत्य, न्याय और राष्ट्र धर्म का संदेश देता है। मंदिर के ध्वजदंड पर करीब 21 किलो सोने की मढ़ाई भी की गई है, जो इसकी भव्यता और आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाती है। इस ऐतिहासिक दिन पूरे मंदिर परिसर में जय श्री राम के उद्घोष और वैदिक मंत्रोच्चार से भव्य वातावरण बना। यह धर्मध्वज न केवल एक झंडा है, बल्कि हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास का जीवन्त प्रतीक बन गया है, जो हिन्दू धर्म और भारतीय सभ्यता की समृद्ध विरासत को दर्शाता है।इस ध्वज की स्थापना के साथ ही अयोध्या ने विश्व के सामने अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से प्रदर्शित किया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। धर्मध्वज के माध्यम से यह संदेश भी जाता है कि कर्मप्रधान विश्व रचि राखा, अर्थात कर्म और कर्तव्य की प्रधानता हो और सत्य की हमेशा जीत हो। इस अवसर ने पूरे देश में श्रद्धा, एकता और सांस्कृतिक गौरव का नया प्रकाश फैलाया है�����.
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज को राष्ट्रीय पर्व की तरह 24 नवंबर 2025 को फहराया गया।
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